आभानेरी : वो गाँव जो आपको सीधा 10वी शताब्दी में ले जाएगा

‘आभानेरी’ के बारे में हमनें बहुत सुना था। आज जब भी स्टेपवेल(बावड़ी) का ज़िक्र होता तो सबसे पहले आभानेरी को याद किया जाता है। तब से मन में था कि इस गाँव में जाना चाहियें आखिर ऐसा क्या ख़ास है यहाँ! अच्छा एक बात अब हम बावड़ी ही लिखेंगे, स्टेपवेल वो मजा नहीं दे रहा है जो बावड़ी बोलने में आता है।

Abhaneri Village
Photo By : Shubham Ameta

चूँकि आभानेरी चाँद बावड़ी की वजह से ही प्रसिद्ध हुआ है तो हमें भी वही देखने की उत्सुकता थी। लेकिन वहाँ पहुँचने पर लगा कि पूरा गाँव ही आभा में लिपटा हुआ है। ऐसा कहते है आभानेरी का शुरूआती नाम ‘आभा नगरी’ था जिसका मतलब है ‘रौशनी का शहर’, लेकिन तब से लेकर तोड़ते-मरोड़ते हुए ये अब ‘आभानेरी’ कहलाने लग गया है।

Kulhadi chai at sikandara
Photo By : Vishwas Singh

जयपुर से दौसा होते हुए करीब 93 किलोमीटर बाइक चलाने के बाद सिकंदरा में चाय-कचौरी ब्रेक लेते ही हम सीधा चल दिए आभानेरी की ओर। आभानेरी आपको सिकंदरा और बांदीकुई के बीच में मिलेगा। शहरी लोग जो गाँव को सुनते आए है और जाने की इच्छा रखते है तो बता दे यह आपको ठेट गाँव का अनुभव करवाएगा।

Harshat mata temple abhaneri
Harshat Mata temple, Abhaneri
Photo By : Vishwas Singh

गाँव में घुसते ही सबसे पहले आपको एक बहुत पुराना झिर्ण-शीर्ण अवस्था में मंदिर दिखेगा। उसे देखते ही हमें उसके बारे में जानने का मन हुआ कि आखिर यह इस हालत में क्यों है? और ठीक क्यों नहीं किया हुआ है?

Hanuman mandir, Abhaneri
Photo By : Shubham Ameta

उसी के पास एक मंदिर और था, हनुमान मंदिर जहां पर प्रसादी का कार्यक्रम चल रहा था। अब नहीं जानने वाले यह ज़रूर जानना चाहेंगे कि प्रसादी क्या होती है? तो उस पर कभी एक आर्टिकल लिख लेंगे तब जान जाइएगा। अरे! कमेंट में पूछ लीजियेगा। बता देंगे।

Harshat mata temple, Abhaneri
Photo By : Shubham Ameta

खैर उसी टूटे-फूटे मंदिर पर आते है। वो देखने में किसी भी एंगल से मॉडर्न आर्किटेक्चर नहीं लग रहा था। जब पास जाकर देखा तो हमारा सोचना बिलकुल सही था। उसमें लगी मूर्तियाँ और कलाकृति उसे 500 साल से ज्यादा भी पुराना बता रही थी।

Harshat Mata temple, Abhaneri
Photo By : Vishwas Singh

वहाँ बैठे पुजारी जो पूजा पाठ में लगे हुए थे उनसे बात हो नहीं पाई। कुछ फोटोग्राफ्स खींचकर हम थोड़ी देर वहीँ बैठे रहे। एक अजीब सुकून था उस जगह। शायद ही मैं उसे किसी ब्लॉग के ज़रिये बता पाउँगा, आप वहीँ जाकर उसे अनुभव करें तो बेहतर होगा। अफ़सोस तब तक भी हमें मंदिर के बारे में कुछ ख़ास जानने को नहीं मिला यहाँ तक की मंदिर किस देवी-देवता का है यह तक पता नहीं चल पाया था।

Abhaneri Village
Photo By : Shubham Ameta

वहाँ से चलने के बाद हमारी नज़र उस बावड़ी को खोजने में लग गयी जिसकी वजह से आभानेरी का नाम भारत के नक़्शे पर आया, ‘चाँद बावड़ी’! उसी मंदिर से सामने की ओर चौकोर आकार में ईमारत दिख रही थी, उसी के अन्दर थी चाँद बावड़ी। चारो ओर से बड़ी-बड़ी दीवारों से गिरी। बाहर से देखने पर एक मामूली जगह लेकिन अन्दर जाने पर आपके अन्दर की सारी क्रिएटिविटी उसके सामने नतमस्तक होती नज़र आएगी। सफ़र की थकान को पल भर में गायब होते देखा है हमनें, और इसका पूरा श्रेय चाँद बावड़ी को जाता है।

Chand Baori, Abhaneri
Photo By : Vishwas Singh

6-9 पिलरों पर टिका उसका एंट्रेंस ही आपको कहीं ओर ले जाएगा। हमनें जैसे ही वो हिस्सा पार किया तब दर्शन हुए चाँद बावड़ी के। एक खूबसूरत महल से सटी हुई। चारो तरफ महल के हिस्से कमरों में बटें हुए थे। उन कमरों में वहाँ तब लोग रहा करते थे और महल में राज परिवार।

chand baori
photo by : vishwas singh
chand baori
Photo By : Vishwas Singh

चाँद बावड़ी सबसे पुरानी बावड़ियों में गिनी जाती है। इसे ‘निकुम्भ डायनेस्टी’ के राजा चाँद ने 800 से 900 शताब्दी के बीच में बनवाया था, उन्ही के नाम पर इसका नाम चाँद बावड़ी पड़ा है। यहाँ बने महल में राज परिवार गर्मियों के दिन में रहने आता था। यह महल बनाया ही इसीलिए गया था। बावड़ी के अन्दर बने होने के कारण बाहरी वातारण से यह ठंडा रहता है। इस महल के चारो और बने कमरों में यहाँ की आम जनता गर्मी से निजात पाने के लिए आ जाया करती थी। इस तरह की बावड़ियाँ पानी के स्टोरेज का काम करती थी।

chand baori
Photo By : Vishwas Singh

चाँद बावड़ी में करीब 3500 सीढियाँ बनी हुई है और यह लगभग 30 मीटर अन्दर तक जाती है यानि की 13 मंजिला ईमारत जितनी। ऐसा कहा जाता है ऊपर की तुलना में चाँद बावड़ी के अन्दर का तापमान 5 से 6 डिग्री तक कम रहता है। तब हमें समझ आया राज परिवार यहाँ क्यों आ जाता था।

chand baori
Photo By : Vishwas Singh

अभी आप यहाँ जाओगे तो बावड़ी के चारो ओर आपको मूर्तियाँ रखी हुई मिलेगी, टूटी-फूटी हालत में। ये सभी उसी टूटे हुए मंदिर की मूर्तियाँ है जो हाल ही में बावड़ी के आसपास रख दी गई है पहले ये मंदिर के ही पास में रखीं हुई थी। यह बात हमें पास ही में चायवाले अंकल ने बताई।

abhaneri bazar
Photo By : Vishwas Singh
harshat mata temple
Photo By : Shubham Ameta

उन्ही अंकल ने इस मंदिर की देवी का नाम भी बताया, मंदिर ‘हर्षत माता’ का है। इस मंदिर के इस हालत में होने का कारण दसवीं शताब्दी के दौरान बाहर के आक्रमणकारियों का इसे तोड़ना बताया है और तब से यह मंदिर इसी हालत में है। तब हमें पता चला कि यह 10वी शताब्दी का बना हुआ है।

लेकिन कुछ भी हो आप इस मंदिर से अपनी नज़र नहीं हटा सकते हो। यह कमाल तब के आर्किटेक्चर्स का है। आज की तारीख में इतनी सुविधायें उपलब्ध होने का बावजूद ऐसा मंदिर या ईमारत बनाना हमारी पंहुच के बाहर है।

बावड़ी और हर्षत माता के मंदिर के बाहर एक छोटा सा बाज़ार लगता है। वहाँ आप स्टोन आर्ट के सामान खरीद सकते हो। हमने आभानेरी की चाय भी वहीँ चखी थी। कुल्हड़ वाली चाय। लेकिन अफ़सोस वो उस बावड़ी के पानी की नहीं थी। बावड़ी अब सूख चुकी है, मंदिर अभी क्षतिग्रस्त अवस्था में है। लेकिन आभा नगरी अभी भी अपनी आभा बिखेर रही है। उसी आभा की वजह से हम जयपुर से 100 किलोमीटर दूर आभानेरी देखने आ गए।

chand baori, abhaneri
Photo BY : Vishwas Singh

आभा नगरी को आभानेरी बनते यहाँ के लोगो ने देखा है। उम्मीद करते है कि आप जल्द ही आभानेरी को देखने जाएंगे, आभानेरी के कुछ ओर बनने से पहले।

अभी के लिए अलविदा। 🙂

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इंजीनियरिंग की नाक़ामी ने लेखक बना दिया है। UdaipurBlog के भरोसे से लेखन चल पड़ा है। बोलचाल वाली भाषा में लिखता हूँ ताकि लोग मुझसे जुड़ाव महसूस करे। रंगमंच से भी जुड़ा हुआ हूँ। उर्दू पढना अच्छा लगता है। बाकि खोज चल रही है। निन्मछपित सोशल मीडिया पर मिल ही जाऊँगा, वहीँ मुलाक़ात करते है फिर।