जयपुर की वो दुर्लभ 16 तस्वीरें जो आपके दादा-पड़दादा के समय की हैं, Jaipur तब Jeypore था।

शहर बदलते हैं। शहरों के हालात बदलते हैं। इन बदलावों को हक़ीक़त का पर्दा देती है तस्वीरें। वो तस्वीरें जो उस समय को क़ैद कर लेती है। हम समय को रोक नहीं सकते है पर पलों को तस्वीरों के रूप में क़ैद ज़रूर कर सकते है। ऐसा हर दौर में होता आया हैं। बहुत पहले आदिमानव गुफाओं में चित्र बनाकर करते थे फिर वही कैनवास पर आने लग गए और उसके बाद फ़ोटोज़ के रूप में।

जयपुर को भी ऐसे ही कुछ फोटोग्राफ़र्स ने अपने-अपने कैमरों में सहेजे रखा था जो अब आप लोगों के सामने लेकर आ रहे हैं। आज जब जयपुर में मेट्रो का विस्तार हो रहा है लेकिन आपको बता दें एक समय ऐसा भी था जब इधर-उधर जाने के लिए बैलगाड़ी और ऊंटगाड़ी ही विकल्प हुआ करती थी। तब Jaipur भी Jeypore हुआ करता था।

अब आपको सीधा ले चल रहे हैं उन दुर्लभ तस्वीरों के पास। सभी तस्वीरें प्रथम स्वतंत्रता संग्राम यानि के 1857 के बाद की हैं :-

  1. jaipur ki sadkein aur library, 1870
    जयपुर शहर और पब्लिक लाइब्रेरी, 1870

     

  2. Chandra Mahal jaipur palace,1870
    चन्द्र महल, जयपुर पैलेस, 1870

     

  3. jaipur shahar, 1875
    जयपुर शहर, 1875

     

  4. जयपुर शहर

     

  5. amber se view, 1890
    आमेर फोर्ट से जयपुर, 1890

     

  6. Albert Hall, Jeypore c.1890
    अल्बर्ट हॉल, 1890

     

  7. सिल्वर जेलेटिन, 1890

     

  8. city palace gate
    सिटी पैलेस गेट

     

  9. Amber fort
    आमेर क़िला

     

  10. tripolia gate, jaipur
    त्रिपोलिया गेट, जयपुर

     

  11. sanganer gate, jauhari bazar
    सांगानेर गेट और जौहरी बाज़ार क्षेत्र

     

  12. Chanpori Gate stereoscopic view,1907
    चंपोरी गेट, जयपुर

     

  13. jaipur shahar, 1906
    जयपुर शहर, 1906

     

  14. A postcard photograph c.1910
    जयपुर शहर, 1910

     

  15. mandir ke baahar ka drishya, 1928
    मंदिर और आसपास का क्षेत्र, 1928

     

  16. Astronomical Observatory, 1931
    एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी, 1931

     

उम्मीद करते है ये 16 फ़ोटोज़ आपको आज के समय से क़रीब 150 साल पीछे ले गई होंगी। आपके पास ऐसी ही कोई पुरानी तस्वीरें पड़ी हो तो कमेंट बॉक्स में उस फ़ोटो के साथ कमेंट करें।

Source: coulmbia.com and british library

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इंजीनियरिंग से ऊब जाने से हालातों ने लेखक बना दिया। हालांकि लिखना बेहद पहले से पसंद था। लेकिन लेखन आजीविका का साधन बन जाएगा इसकी उम्मीद नहीं थी। UdaipurBlog ने विश्वास दिखाया बाकी मेरा काम आप सभी के सामने है। बोलचाल वाली भाषा में लिखता हूँ ताकि लोग जुड़ाव महसूस करे। रंगमंच से भी जुड़ा हूँ। उर्दू पढ़ना अच्छा लगता है। बाकि खोज चल रही है। निन्मछपित सोशल मीडिया पर मिल ही जाऊँगा, वहीँ मुलाक़ात करते है फिर।