झूठे दावे? : राजस्थान में अब भी 18,000 घरों में बिजली नहीं पहुंची। सच क्या है?

अभी हर न्यूज़ चैनल से लेकर सोशल मीडिया फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी से लेकर यहां तक की इन्स्टाग्राम स्टोरीज़ तक में यही देखने, सुनने को मिल रहा है कि भारत के हर गाँव में बिजली तय सीमा से पहले ही पंहुचा दी गई है।

दुसरे राज्यों की ज़मीनी हक़ीक़त का तो पता नहीं पर राजस्थान पर ये बात लागू नहीं नहीं होती है। राजस्थान के तीन डिस्कॉम जयपुर, जोधपुर और अजमेर की कहानी कुछ और ही है। जोधपुर डिस्कॉम के 18,000 घरों में अबतक बिजली नहीं पहुंची है। जोधपुर के आसपास क़रीब 4500 ढाणियां है जिनमें हरेक की आबादी 100 के आसपास की होगी, में अभी तक भी बिजली नहीं आई है। इधर सरकार द्वारा ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि भारत में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण हो चूका है। गाँवों तक बिजली पहुंचा दी गई है पर इन ढाणियों का क्या? क्या ये भारत में नहीं आती है? क्या इन ढाणियों में रहने वाले लोग वोट नहीं डालते है?

हो सकता है अगले कुछ ही दिनों में इन घरों तक भी बिजली पहुंच ही जाए, जो एक अच्छी बात होगी। लेकिन टारगेट पूरा करने से पहले ही उसे पूरा बता देना! ये कैसी ईमानदारी है? सिर्फ तय सीमा से पहले टारगेट अचीव करने वाली बात जनता तक पहुँचाना ही सरकार का मकसद था या वो वाक़ई इस प्रोजेक्ट को लेकर सीरियस है?

जयपुर डिस्कॉम में 6000 से ऊपर गाँव आंशिक विद्युतीकरण वाले थे उनमें से 2000 गाँवों में पूरी तरह विद्युतीकरण कर दिया है। बचे गाँव 2019 तक पूर्णरूप से विद्युतीकरण श्रेणी में आ जाएँगे। 

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Picture Courtesy: Livemint

कुछ ऐसी ही स्थिति अजमेर डिस्कॉम की भी है। लगभग 8800 से ज्यादा गाँवों में आंशिक विद्युतीकरण ही हुआ है। लेकिन बात कुछ और चलाई जा रही है। अधिकारीयों के जवाब भी इस मुद्दे पर अलग-अलग है। बाकि मंत्रियों के बयान तो आजकल आप सुन ही रहे है।

काम की बात ये है कि इस तरह की बातें करने से पहले सरकार को ज़रा दूर-दराज की ढाणियों-छोटे गाँवों का भी ख़याल कर लेना चाहिए था। 

 

NEWS Source: Rajasthan Patrika

 

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इंजीनियरिंग से ऊब जाने से हालातों ने लेखक बना दिया। हालांकि लिखना बेहद पहले से पसंद था। लेकिन लेखन आजीविका का साधन बन जाएगा इसकी उम्मीद नहीं थी। UdaipurBlog ने विश्वास दिखाया बाकी मेरा काम आप सभी के सामने है। बोलचाल वाली भाषा में लिखता हूँ ताकि लोग जुड़ाव महसूस करे। रंगमंच से भी जुड़ा हूँ। उर्दू पढ़ना अच्छा लगता है। बाकि खोज चल रही है। निन्मछपित सोशल मीडिया पर मिल ही जाऊँगा, वहीँ मुलाक़ात करते है फिर।