रंग-ए-रेख़्ता : रेख़्ता फाउंडेशन की ओर से जेकेके में दो दिवसीय आर्ट एंड लिटरेचर फेस्टिवल

Rekhtaजो लोग रेख़्ता से अब तक यूट्यूब या सोशल मीडिया के ज़रिये ही रूबरू होते आए है उनके लिए एक बहुत अच्छी खबर है। रेख़्ता फाउंडेशन की ओर से रंग-ए  रेख़्ता का आयोजन जवाहर कला केंद्र पर होने जा रहा है।  ये दो दिवसीय आर्ट एंड लिटरेचर फेस्टिवल 24 और 25 फरवरी को शाम 6 बजे से शुरू होगा।Rang e rekhta

( रजिस्ट्रेशन के लिए यहाँ दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिए – http://rangerekhta.org/ )

पिछले कुछ समय से रेख़्ता को पढने-सुनने वालों की तादाद एकदम से बढ़ी है। इसकी वजह है उर्दू और उर्दू को चाहने वाले लोग। उर्दू को दुनिया की सबसे मीठी भाषा का दर्जा मिला हुआ है। कुछ साल पहले तक उर्दू को पढने-सुनने वालों में कमी देखि गई थी लेकिन अब बदलाव नज़र आ रहा है। आज का यूथ मुशायरो, शेरो-शायरिया, दास्तानगोई, उर्दू सेशंस, उर्दू हिस्ट्री जैसे विषय में दिलचस्पी लेने लगा है। इसका श्रेय रेख़्ता फाउंडेशन को भी जाता है जो उर्दू को जिंदा रखने की और उर्दू लिटरेचर को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुँचाने का काम कर रहा है। रेख़्ता फाउंडेशन का उर्दू फेस्टिवल जश्न-ए- रेख़्ता को देश-विदेश से ढेर सारी मोहब्बतें मिलती रही है।

रंग-ए- रेख़्ता, कुछ अलग तरह का फेस्ट है जो भारत के शहरों में घूमेगा। इसका पहला संस्करण चंडीगढ़ में हुआ था। अब जयपुर में 24 और 25 फरवरी को दूसरा संस्करण होगा।

Rekhta and jkkरेख़्ता फाउंडेशन और जवाहर कला केंद्र के सहयोग से जयपुरवासियों के लिए यह एक शानदार फेस्टिवल साबित होने वाला है। जयपुर में हर उम्र के लोग उर्दू लिटरेचर को पढ़ना पसंद करते है। अब तक रेख़्ता फाउंडेशन का उर्दू फेस्टिवल जश्न-ए- रेख़्ता दिल्ली में ही होता आया है। लेकिन इस बार जयपुर के उर्दू लवर्स के लिए यह एक अच्छा मौका है कि रेख़्ता फाउंडेशन उनके लिए जयपुर में रंग-ए-रेख़्ता लेकर आ रहा है।

 

प्रोग्राम स्केड्यूल :

 

24 फरवरी, 2018 –Faiz sahabशाम 6:30 बजे : फैज़ साहब पर चर्चा : राधिका चोपड़ा और दानिश इकबाल

 

Sabri brothersशाम 7:30 बजे : साबरी ब्रदर्स द्वारा क़व्वाली

 

 

25 फरवरी, 2018 –Begum akhtarशाम 6 बजे से : बेग़म अख्तर को ट्रिब्यूट : विद्या शाह और दानिश हुसैन

 

Waseem-Barelvi
waseem barelvi sahab

शाम 7:30 बजे : मुशायरा : शीन काफ़ निज़ाम, वसीम बरेलवी, शकील आज़मी, शरीक कैफ़ी, शकील जमाली, मलका नसीम, अभिषेक शुक्ल, मुज़फ्फर अब्दाली, मदन मोहन दानिश, बकुल देव

 

आइये हम सब रेख़्ता हो जाते है। 🙂

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इंजीनियरिंग से ऊब जाने से हालातों ने लेखक बना दिया। हालांकि लिखना बेहद पहले से पसंद था। लेकिन लेखन आजीविका का साधन बन जाएगा इसकी उम्मीद नहीं थी। UdaipurBlog ने विश्वास दिखाया बाकी मेरा काम आप सभी के सामने है। बोलचाल वाली भाषा में लिखता हूँ ताकि लोग जुड़ाव महसूस करे। रंगमंच से भी जुड़ा हूँ। उर्दू पढ़ना अच्छा लगता है। बाकि खोज चल रही है। निन्मछपित सोशल मीडिया पर मिल ही जाऊँगा, वहीँ मुलाक़ात करते है फिर।